रविवार, 27 मार्च 2016

Preparation Tips of Civil Services IAS हिन्दी

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कैसे करें

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रोजमर्रा की दिनचर्या में पढऩे का कोई उपयुक्त वक्त नहीं होता क्योंकि यह छात्र की जरूरतों और सुविधा के हिसाब से तय होता है। लेकिन इसमें नियमितता जरूरी है। आपको तब तक कम-से-कम 5-6 घंटे भी पढ़ाई नियमित रखनी होगी जब तक कि आप इस परीक्षा में चुन नहीं लिए जाते हैं। इसकी सभी परीक्षाओं(पीटी-मेन, मेन-इंटरव्यू एवं इंटरव्यू-पीटी) के बीच लंबा अंतराल रहता है, इसलिए ज्यादातर छात्र इस महत्वपूर्ण समय को हल्के में लेते हैं और पढ़ाई के लिए इस समय का सदुपयोग नहीं करते। लेकिन इसमें सफलता का मूलमंत्र यही है कि जब तक आप अपनी पसंद की नौकरी पाने में कामयाब नहीं हो जाते तब तक नियमित रूप से अपनी पढ़ाई जारी रखें।



दिनचर्या : इस परीक्षा की प्रक्रिया लंबी होती है और प्रत्येक चरण में आपको अलग-अलग बिंदुओं पर केंद्रित रहना पड़ता है इसलिए दिनचर्या भी बदलती रहती है। आम तौर पर मैं सुबह 6 से 6.30 बजे तक उठ जाता था। सात बजे तक मैं पढऩे के लिए बैठ जाता था। मैंने अपनी दिनचर्या को तीन खंडों में बांटा हुआ था और प्रत्येक खंड के लिए तीन घंटे देता था। यह थोड़ी लचीली दिनचर्या थी। मैं सुबह 7 से 12 के बीच तीन घंटे और फिर 12-6 तक तथा 6-12 तक तीन-तीन घंटे की पढ़ाई करता था। इन प्रत्येक तीन-तीन घंटे की पढ़ाई में दो घंटे की गहन पढ़ाई होती थी। कुल मिलाकर औसतन 5-6 घंटे की पढ़ाई जरूर होनी चाहिए। प्रतिदिन 2-3 घंटे मैं वैकल्पिक और जनरल स्टडीज के एक विषय पर पढ़ाई करने में लगाता था। अभ्यर्थियों को मैं सलाह देना चाहूंगा कि वे महीने में दो बार 2-3 घंटे की पढ़ाई लेख की तैयारी के लिए करें। प्रतिदिन वैकल्पिक विषय पर जरूर ध्यान दें। इतिहास की पढ़ाई को भी ज्यादा समय तक छोडऩा उचित नहीं होता। जांच परीक्षा बहुत महत्वपूर्ण होती है इसलिए हर हफ्ते इसमें शामिल होना चाहिए। आगामी जांच परीक्षा के लिए आपको पांच-छह दिन में सिलेबस पूरा करना होगा।

अध्ययन का उद्देश्य : मुख्य उद्देश्य किसी विषय में सिर्फ डिग्री प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि यूपीएससी की परीक्षा में सफल होना और अच्छी रैंक हासिल करना भी होता है। इसके लिए आपको प्रश्नपत्र की पद्धति को समझना होगा... कि वे क्या चाह रहे हैं और कैसे आप अच्छे अंक ला सकते हैं। यूपीएससी द्वारा पांच साल पहले पूछे गए सवालों का पैटर्न अब बदल चुका है। अब ये सवाल खास बिंदु पर केंद्रित रहते हैं। वे खास क्षेत्रों में विश्लेषण की मांग करते हैं ताकि आपको सभी विषयों की गहरी समझ हो सके। लेकिन सिलेबस में दिए गए कुछ क्षेत्रों में आपको विषय की भी गहरी जानकारी होनी चाहिए। कॉन्सेप्ट को स्पष्ट रूप से समझना बहुत महत्वपूर्ण होता है, आपको अपनी सोच और तार्किक क्षमताएं विकसित करनी होगी। लिहाजा जब कोई प्रश्न पूछा जाए तो आप विषय को लेकर कनफ्यूज न हों और जो पूछा जा रहा है, उसी का जवाब दे सकें। उत्तर लिखते वक्त आप बहुत ज्यादा अनिश्चितता और सामान्य जानकारी के आधार पर लिखने का प्रयास नहीं कर सकते। इस परीक्षा में अब 150-200 शब्दों में 10 अंक के सवाल पूछे जाने लगे हैं। लिहाजा आपको उसी बिंदु पर उत्तर लिखना होता है। इन सबसे आपके जवाब समृद्ध होंगे।

लिखने की पद्धति : अभ्यर्थियों को अक्सर संदेह रहता है कि वे सवालों के जवाब प्वाइंट के हिसाब से लिखें या पैराग्राफ पद्धति से। लेकिन इसकी कोई तय पद्धति नहीं है क्योंकि यूपीएससी आपसे किसी खास पद्धति में जवाब लिखने के लिए नहीं कहता है। आप अपनी सुविधानुसार जवाब लिख सकते हैं। यदि आपके पास फैक्ट्स ज्यादा हैं तो निश्चित रूप से प्वाइंट में जवाब लिखें। लेकिन यदि प्रश्नपत्र बहुत ज्यादा तार्किक जवाब मांग रहा हो तो आपको तर्क विकसित करना होगा। लिखने की पद्धति प्रश्न की मांग पर निर्भर करती है। लिखना यूपीएससी परीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है क्योंकि 2025 अंकों में 1750 अंक लिखित परीक्षा के लिए ही निर्धारित होते हैं। इन प्रश्नों के उत्तर में आपके विचारों की स्पष्टता झलकनी चाहिए। 
जब आप इस परीक्षा की तैयारी शुरू करते हैं तो लेख लिखने और इंटरव्यू देने के लिए भी आपकी तैयारी शुरू हो जानी चाहिए। आपको अपनी सोच प्रक्रिया, चीजों को सरल बनाने तथा उन्हें विभिन्न पहलुओं के लिहाज से विश्लेषण करने की क्षमता स्पष्ट होनी चाहिए। इससे आपको लेख लिखने में मदद मिलेगी। किसी लेख की संरचना और प्रवाह क्षमता बहुत महत्वपूर्ण होती है। लेख का प्रवाह तभी बन पाएगा जब आपके दिमाग में विषय की समझ और अवधारणा स्पष्ट तथा गहरी होगी। 
विश्वास और आत्मविश्वास : इस परीक्षा में कूपमंडूकता अच्छी बात नहीं मानी जाती। शुरुआती दौर में ही आपने जो कुछ पढ़ा है, वही बाद की तैयारी में भी काम आता है। यह परीक्षा विषयनिष्ठ होती है। आम तौर पर लोग सोचते हैं कि पहले ही प्रयास में यदि इस परीक्षा में सफलता नहीं मिलती तो आगे प्रयास नहीं करना चाहिए। यूपीएससी आपको इसमें शामिल होने का 4-6 मौका देता है। अत: आयोग कुछ नहीं मानता कि वह पहले ही प्रयास में योग्य उम्मीदवार का चयन कर लेगा। यह वस्तुनिष्ठ आधारित परीक्षा नहीं है। लिहाजा यदि आप तैयार और आत्मविश्वासी हैं तो भी बहुत संभावना है कि आपको अपनी पसंद की नौकरी या रैंक न मिल पाए या आखिरी सूची में भी आप जगह न बना पाएं। अपनी क्षमताओं को लेकर भरोसा और आत्मविश्वास बनाए रखना इस परीक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

तनाव पर काबू : तनाव में रहने से आपकी रचनात्मकता प्रभावित होती है और आपकी सोचने की प्रक्रिया बाधित होती है। कुछ शौक पालकर इससे बचने की कोशिश करें, मैंने रचनात्मक आयोजनों पर मित्रों से चर्चा किया करता था। इंटरव्यू के दौरान तनाव दूर करने वाले शौक भी उपयोगी साबित होते हैं। 
इंटरव्यू : इंटरव्यू इस साल के लिए आपके पूरे साल की मेहनत का निर्णायक दौर होता है। अत: इंटरव्यू देते समय कुछ बुनियादी तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए। मसलन इंटरव्यू के दौरान ईमानदार रहें और सवालों का जवाब देने में गंभीरता बरतें क्योंकि जिस नौकरी के लिए आप पर विचार किया जा रहा है वह सबसे कठिन जिम्मेदारियों में से एक है। किसी सवाल का सतही जवाब कारगर नहीं होता। वे आपकी गंभीरता और ईमानदारी परखते हैं। अपनी वास्तविक स्थिति पेश करने के बजाय लफ्फाजी न करें। यह कोई सवाल जवाब का सत्र नहीं होता। अपने व्यक्तित्व का सकारात्मक पहलू प्रदर्शित करने का प्रयास करें। यह आपके ज्ञान की परीक्षा नहीं होती, बल्कि वे आपके कार्य और संवाद दक्षता की परख करते हैं। आपके बोलते समय वे आपके आत्मविश्वास का मूल्यांकन करते हैं। वे कोई चीज आत्मसात करने की आपकी क्षमता और समझ को परखते हैं। इस परीक्षा की तैयारी के शुरुआती चरण में ही अभ्यर्थी को इंटरव्यू की तैयारी भी कर लेनी चाहिए जिसकी बाद में सिर्फ फाइन-ट्यूनिंग या पॉलिशिंग की जरूरत रह जाती है। इंटरव्यू सिर्फ यह परखने का तरीका है कि आप किस प्रकार जवाब या प्रतिक्रिया देते हैं। आपकी प्रतिक्रिया जानने के लिए आपसे अस्पष्ट सवाल भी पूछे जा सकते हैं। इसी तरह वे आपके तनाव का लेवल परखने के लिए भी कुछ सवाल कर सकते हैं।




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