सोमवार, 1 मई 2017

वो सोचो जो आप चाहते हो (Law of Attraction in Hindi)

वो सोचो जो आप चाहते हो  (Law of Attraction in Hindi)
दोस्तों आपने “Om Shanti Om”  का ये dialogue “अगर किसी  चीज़  को  दिल  से  चाहो  तो  सारी  कायनात  उसे  तुम  से  मिलाने  में  लग  जाती  है” ज़रूर सुना होगा. इसी को सिद्धांत के रूप में Law of Attraction  कहा जाता है. ये वो सिद्धांत है जो कहता है कि आपकी सोच हकीकत बनती है. Thoughts become things. 
For example:  अगर आप सोचते हैं की आपके पास बहुत पैसा है तो सचमुच आपके पास बहुत पैसा हो जाता है, यदि आप सोचते हैं कि मैं  हमेशा गरीबी में ही जीता रह जाऊंगा, तो ये भी सच हो जाता है.
शायद सुनने में अजीब लगे पर ये एक सार्वभौमिक सत्य है. A Universal Truth. यानि हम अपनी सोच के दम पर जो चाहे वो बन सकते हैं. और ये कोई नयी खोज नहीं है भगवान् बुद्ध ने  भी कहा  है  “हम जो कुछ भी हैं वो हमने आज तक क्या सोचा इस बात का परिणाम है. ”   स्वामी विवेकानंद  ने भी यही बात इन शब्दों में कही है ” हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं. विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं.”
पर इतनी बड़ी बात को इतनी आसानी से मान लेना बहुत कठिन है. आपके मन में इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ सकते हैं. और आज हम कुछ इसी तरह के सवालों का समाधान जानने की कोशिश करेंगे. आज का ये लेख इस विषय पर सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक  “ The Law of Attraction” का Hindi Translation  है. इसे Steve Pavlina  ने लिखा है.
THE LAW OF ATTRACTION
आकर्षण  का  सिद्धांत 
The Law of Attraction या  आकर्षण  का  सिद्धांत  यह  कहता  है  कि  आप  अपने  जीवन  में  उस  चीज  को  आकर्षित  करते  हैं  जिसके  बारे  में  आप  सोचते  हैं . आपकी  प्रबल सोच हकीक़त  बनने  का  कोई  ना  कोई  रास्ता  निकाल लेती है . लेकिन  Law of Attraction कुछ  ऐसे  प्रश्नों  को  जन्म  देता  है  जिसके  उत्तर  आसान  नहीं  हैं .पर  मेरा  मानना  है  कि  problem Law of Attraction कि  वजह  से  नहीं  है   बल्कि  इससे  है  कि  Law of Attraction को  objective reality (वस्तुनिष्ठ वास्तविकता ) में  कैसे  apply करते  हैं .
यहाँ  ऐसे  ही  कुछ  problematic questions दिए  गए  हैं  ( ये  उन  questions का  generalization हैं  जो  मुझे  email द्वारा  मिले  हैं )
क्या  होता है  जब  लोगों  की  intention (इरादा,सोच,विचार,उद्देश्य)  conflict करती  है ,जैसे  कि  दो  लोग  एक  ही  promotion के  बारे  में  सोचते  हैं , जबकि एक  ही  जगह  खाली   है ?क्या  छोटे  बच्चों , या  जानवरों  की  भी  intentions काम  करती  है ?अगर  किसी  बच्चे  के  साथ  दुष्कर्म  होता  है  तो  क्या  इसका  मतलब  है  कि  उसने  ऐसा  इरादा  किया  था ?अगर  मैं  अपनी  relation अच्छा  करना  चाहता  हूँ  लेकिन  मेरा / मेरी  spouse इसपर  ध्यान  नहीं  देती , तो  क्या  होगा ?
ये  प्रश्न  Law of Attraction की  possibility को  कमज़ोर  बनाते  हैं .कभी – कभार  Law of Attraction में  विश्वास  करने  वाले  लोग  इसे  justify करने  के  लिए  कुछ  ज्यादा  ही  आगे  बढ़  जाते  हैं . For Example, वो  कहते  हैं  कि  बच्चे  के  साथ  दुष्कर्म  इसलिए  हुआ  क्योंकि  उसने  इसके  बारे  में  अपने  पिछले  जनम  में  सोचा  था . भाई , ऐसे  तो  हम किसी  भी  चीज  को  explain कर  सकते  हैं , पर मेरी  नज़र  में  तो  ये  तो  जान  छुड़ाने  वाली  बात  हुई .
मैं  औरों  द्वारा  दिए  गए  इन  प्रश्नों  के  उत्तर  से   कभी  भी  satisfy नहीं  हुआ , और  यदि  Law of Attraction में  विश्वास  करना  है  तो  इनके  उत्तर  जानना  महत्त्वपूर्ण  है .कुछ  books इनका  उत्तर  देने  का  प्रयास  ज़रूर  करती  हैं  पर  संतोषजनक  जवाब  नहीं  दे  पातीं . पर  subjective reality (व्यक्ति – निष्ठ वास्तविकता )के  concept में  इसका  सही  उत्तर  ढूँढा जा  सकता  है .

Subjective Reality एक  belief system (विश्वास प्रणाली) है  जिसमे
 (1)   सिर्फ  एक consciousness (चेतना) है ,
 (2)   आप  ही  वो  consciousness हैं ,
 (3)   हर  एक  चीज , हर  एक  व्यक्ति,  जो  वास्तविकता  में  है वो आप  ही  की  सोच  का  परिणाम  है .
शायद  आप  को  आसानी से दिखाई  ना  दे  पर  subjective reality Law of Attraction के  सभी  tricky questions का  बड़ी  सफाई  से  answer देती  है .  मैं  explain करता  हूँ ….
Subjective reality में  केवल  एक  consciousness होती   है – आपकी  consciousness. इसलिए पूरे ब्रह्माण्ड में intentions का एक ही श्रोत होता है -आप . आप भले ही वास्तविकता में तमाम लोगों को आते-जाते, बात करते देखें , वो सभी आपकी consciousness के भीतर exist करते हैं. आप जानते हैं कि आपके सपने इसी तरह काम करते हैं,पर आप ये नहीं realize करते की आपकी waking reality एक तरह का सपना ही है. वो सिर्फ इसलिए सच लगता है क्योंकि आप विश्वास करते हैं कि वो सच है.
चूँकि और कोई भी जिससे आप मिलते हैं वो आपके सपने का हिस्सा हैं, आपके अलावा किसी और की कोई intention नहीं हो सकती.सिर्फ आप ही की intentions हैं. पूरे Universe में आप अकेले सोचने वाले व्यक्ति हैं.
यह ज़रूरी है कि subjective reality में “आप” को अच्छे से define किया जाये . “आप” आपका शरीर नहीं है. “आप” आपका अहम नहीं है. मैं यह नहीं कह रहा हूँ की आप एक conscious body हैं जो unconscious मशीनों के बीच घूम रहे हैं. यह तो subjective reality की समझ के बिलकुल उलट है. सही viewpoint यह है कि आप एक अकेली consciousness हैं जिसमे सारी वास्तविकता घट रही है.
Imagine करिए की आप कोई सपना देख रहे हैं. उस सपने में आप वास्तव में क्या हैं ?  क्या आप वही हैं जो आप खुद को सपने में देख रहे हैं? नहीं, बिलकुल नहीं , वो तो आपके सपने का अवतार है. आप तो सपना देखने वाला व्यक्ति हैं.पूरा सपना आपकी consciousness में होता है. सपने के सारे किरदार आपकी सोच का परिणाम हैं, including  आपका खुद का अवतार.  दरअसल , यदि आप lucid dreaming सीख लें तो आप आपने सपने में ही अपने अवतार बदल सकते हैं. Lucid dreaming में आप वो हर एक चीज कर सकते हैं जिसको कर सकने में  आपका यकीन हैं.
Physical reality इसी तरह से काम करती है. यह ब्रह्माण्ड आप के सपने के  ब्रह्माण्ड की तुलना में  कहीं घना है, इसलिए यहाँ बदलाव धीरे-धीरे होता है. पर यह reality भी आपके विचारों के अनुरूप होती है, ठीक वैसे ही जैसे आपके सपने आपके सोच के अनुरूप होते है. “आप” वो dreamer हैं जिसके सपने में यह सब घटित हो रहा है. कहने का मतलब; यह एक भ्रम है कि और लोगों कि intentions है, वो तो बस आपकी सोच का परिणाम हैं.
Of course, यदि आप बहुत strongly believe करते हैं कि औरों की intentions हैं, तो आप अपने लिए ऐसा ही सपना बुनेंगे.पर ultimately वो एक भ्रम है.
तो आइये देखते हैं कि Subjective Reality  कैसे Law of Attraction के कठिन प्रश्नों का उत्तर देती है:
क्या  होता है  जब  लोगों  की  intention (इरादा,सोच,विचार,उद्देश्य)  conflict करती  है ,जैसे  कि  दो  लोग  एक  ही  promotion के  बारे  में  सोचते  हैं , जबकि एक  ही  जगह  खाली   है ?
चूँकि आप अकेले  ही ऐसे  व्यक्ति हैं जिसकी intentions हैं, ये  महज   एक  internal conflict है – आपके  भीतर  का . आप  खुद  उस  thought(intention) को  जन्म  दे  रहे  हैं  कि  दोनों  व्यक्ति  एक  ही  position चाहते  हैं . लेकिन  आप  ये  भी  सोच  रहे  हैं  (intending) कि एक ही व्यक्ति को यह position मिल  सकती  है. .यानि  आप competition intend कर रहे हैं. यह पूरी  situation आप ही की creation है. आप competition में believe करते हैं, इसलिए आपके जीवन  में वही घटता  है. शायद आपकी  पहले  से ही  कुछ  belief है (thoughts and intentions)  कि  किसको  promotion मिलेगी , ऐसे  में  आपकी  उम्मीद  हकीकत  बनेगी. पर  शायद  आप  की  ये  belief हो  कि  life unfair है  uncertain है , तो  ऐसे  में  आपको  कोई  surprise मिल  सकता  है  क्योंकि  आप  वही  intend कर  रहे  हैं .
अपने यथार्थ  में  एक  अकेला  In tender होना   आपके  कंधे  पर  एक  भारी  जिम्मेदारी  डालता  है . आप  ये  सोच  कर  की  दुनिया  अनिश्चित  है  unfair है ,  आदि  , अपनी  reality का control  छोड़  सकते  हैं , पर  आप  अपनी  जिम्मेदारी  नहीं  छोड़  सकते  हैं . आप  इस  Universe के एक  मात्र रचियता हैं . यदि  आप  युद्ध , गरीबी , बिमारी , इत्यादि  के  बारे  में  सोचेंगे  तो  आपको  यही  देखने  को  मिलेगा . यदि  आप  शांती , प्रेम , ख़ुशी  के  बारे  में  सोचेंगे  तो  आपको  ये  सब  हकीकत में होते हुए दिखेगा . आप  जब  भी  किसी  चीज  के  बारे  में  सोचते  हैं  तो , तो  दरअसल  उस सोच को  वास्तविकता में प्रकट होने का आह्वान करते हैं.
क्या  छोटे  बच्चों , या  जानवरों  की  भी  intentions काम  करती  है ?
नहीं , यहाँ  तक  की  आपके  शरीर  की  भी  कोई  intention नहीं  होती  है —सिर्फ  आपके  consciousness की  intentions होती  हैं . आप  अकेले  हैं  जिसकी  intentions हैं , इसलिए  वो  होता  है  जो  आप  बच्चे  या  जानवरों  के  लिए  सोचते  हैं . हर  एक  सोच  एक  intention है , तो  आप  जैसे  भी  उनके बारे  में  सोचेंगे  यथार्थ  में  उनके  साथ वैसा  ही  होगा . ये  धयन  में  रखिये  की  beliefs hierarchical (अधिक्रमिक) हैं , इसलिए यदि  आपकी  ये  belief की  वास्तविकता  अनिश्चित  है , uncontrollable है  ज्यादा  शशक्त है  तो  ये  आपकी  अन्य  beliefs, जिसमे  आपको  कम  यकीन  है , को  दबा देंगी . आपके  सभी  विचारों  का  संग्रह   ये  तय  करता  है  की  आपको  हकीकत  में  क्या  दिखाई  देगा .
अगर  किसी  बच्चे  के  साथ  दुष्कर्म  होता  है  तो  क्या  इसका  मतलब  है  कि  उसने  ऐसा  इरादा  किया  था ?
नहीं . इसका  मतलब  है  की  आपने  ऐसा  intend किया  था . आप  child abuse के  बारे  में  सोच  कर  उससे  वास्तविकता में  होने के  लिए  intend करते  हैं .आप  जितना  ही  child abuse के  बारे  में  सोचेंगे ( या  किसी  और  चीज  के  बारे  में ) उतना  ही  हकीकत  में  आप  उसका  विस्तार  देखेंगे . आप  जिस  बारे  में  भी  सोचते  हैं  उसका  विस्तार  होता  है , और  वो बस  आप तक  ही  सीमित  नहीं  होता  बल्की  पूरे  ब्रह्माण्ड  में  ऐसा  होता  है .
अगर  मैं  अपनी  relation अच्छा  करना  चाहता  हूँ  लेकिन  मेरा / मेरी  spouse इसपर  ध्यान  नहीं  देती , तो  क्या  होगा ?
यह  intending conflict का  एक  और  उदाहरण  है . आप  एक  intention अपने  अवतार  की  कर  रहे  हैं  और  एक  अपने  spouse की  , तो  जो actual intention पैदा  होती  है  वो  conflict की  होती  है . इसलिए  आप  जो  experience करते  हैं , depending on your higher order beliefs, वो  आपके  spouse के  साथ  आपका  conflict होता  है . अगर  आपकी  thoughts conflicted हैं  तो  आपकी  reality भी  conflicted होगी .
इसीलिए  अपने  विचारों  की  जिम्मेदारी  लेना  इतना  महत्त्वपूर्ण  है . यदि  आप  दुनिया  में  शांती  देखना  चाहते  हैं  तो  अपनी  reality में  हर एक  चीज  के  लिए  शांती  intend कीजिये . यदि  आप  loving relationship enjoy करना  चाहते  हैं  तो  सभी  के  लिए  loving relationships intend कीजिये . यदि  आप  ऐसा  सिर्फ  अपने  लिए  ही  intend  करते  हैं  और  दूसरों  के  लिए  नहीं  तो  इसका  मतलब  है  की  आप  conflict, division, separation  intend कर  रहे  हैं , और  as a result आप  यही  experience करेंगे .
अगर  आप  किसी  चीज  के  बारे  में  बिलकुल  ही  सोचना  छोड़  देंगे  तो  क्या  वो  गायब  हो  जाएगी ? हाँ , technically वो  गायब  हो  जाएगी . लेकिन  practically  आप  जिस  चीज  को  create कर  चुके  हैं  उसे  uncreate करना लगभग असंभव  है . आप  उन्ही  समस्यों  पर  focus कर  के  उन्हें  बढाते  जायेंगे . पर  जब  आप   अभी   जो  कुछ  भी  वास्तविकता  में  अनुभव  कर  रहे  हैं  उसके  लिए  खुद  को  100 % responsible मानेंगे  तो  आप  में  वो  शक्ति  आ  जाएगी  जिससे  आप  अपने  विचारों  को  बदलकर  अपनी  वास्तविकता  को  बदल  सकते  हैं .
ये  सारी  वास्तविकता  आप  ही  की  बनाई  हुई  है . उसके  बारे  में  अच्छा  feel करिए .  विश्व  की  richness के  लिए  grateful रहिये .  और  फिर  अपने  decisions और  intentions से  उस  reality का  निर्माण  करना  शुरू  कीजिये  जो  आप  सच -मुच  चाहते  हैं .उस  बारे  में  सोचिये  जिसकी आप  इच्छा  रखते  हैं  , और  जो  आप  नहीं  चाहते  हैं उससे  अपना  ध्यान  हटाइए .  ये  करने  का  सबसे  आसान  और  natural तरीका  है  अपने  emotions पर  ध्यान  देना . अपनी  इच्छाओं  के  बारे  में  सोचना  आपको  खुश  करता  है  और  जो आप  नहीं  चाहते  हैं  उस  बारे  में  सोचना  आपको  बुरा  feel कराता  है . जब  आप  notice करें  की  आप  बुरा  feel कर  रहे  हैं  तो  समझ  जाइये  की  आप  किसी  ऐसी  चीज  के  बारे  में  सोच  रहे  हैं  जो  आप  नहीं  चाहते  हैं . वापस  अपना  focus उस  तरफ  ले  जाइये  जो  आप  चाहते  हैं , आपकी  emotional state बड़ी  तेजी  से  improve होगी . जब  आप  बार  बार  ऐसा  करने  लगेंगे  तब  आपको  अपनी  physical reality में  भी  बदलाव  आना  नज़र  आएगा , पहले  धीरे -धीरे  और  बाद  में  बड़ी  तेजी  से .
मैं  भी  आपकी  consciousness का  ही  परिणाम  हूँ . मैं  वैसे  ही  करता  हूँ  जैसा  की  आप  मुझसे  expect करते  हैं . यदि  आप  मुझे  एक  helpful guide के  रूप  में  expect करते  हैं , तो  मैं  वैसा  ही  बन  जाऊंगा . यदि  आप  मुझे  गहन और व्यवहारिक होना expect करते  हैं  तो  मैं  वैसा  बन  जाऊंगा . यदि  आप  मुझे  confused और  बहका हुआ  expect करते  हैं  तो  मैं  वैसा  बन  जाऊंगा . पर  मैं  ऐसा  कोई  “मैं ” नहीं  हूँ  जो  आपसे  अलग  है . मैं  बस  आपकी  creations में  से  एक  हूँ . मैं  वो  हूँ  जो  आप  मेरे  लिए  intend करते  हैं . और  कहीं  ना  कहीं  आप  पहले  से  ये  जानते  हैं , क्यों  है  ना ?
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आपकी सफलता (Your Success): How to get Success in your Life.

आपकी सफलता (Your Success)
आज तक संसार में कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमताओं का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाया है और न ही यह सम्भव है कि वह अपनी समस्त क्षमताओं का उपयोग करने में सफल हो जाए। इतनी असीमित क्षमताएं इस मनुष्य ने यानि आपने अपने अन्दर समेट रखी हैं। ईश्वर के पश्चात् यदि कोई सर्वशक्तिमान है तो वह केवल मनुष्य, केवल आप ही हैं। ईश्वर में और आप में केवल यही अन्तर है कि वह अदृश्य है और आप दृश्य।
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, अमरीका का छात्र और राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संस्था (नासा) का वह प्रतिष्ठित वैज्ञानिक अंतरिक्ष के अनन्त विस्तार में फैले सितारों और ग्रहों के अस्तित्व को उगलियों से छूकर महसूस कर लेता था, लेकिन उन्हें देख नहीं पाता था। कारण, भौतिकविद् केंट कुलर्स जन्मान्ध थे।
उनका वैज्ञानिक तथ्य था कि प्रत्येक तारे से प्रकाश की किरणों के अतिरिक्त विद्युत्-चुम्बकीय तरंगें भी निकलती हैं। अतः कुलर्स का विशेष कम्प्यूटर उन तरंगों को ध्वनियों और दृश्यों में बदलने के बजाय उन्हें एक स्पर्शपटल पर उभरे बिन्दुओं के रूप में अनूदित कर देता था और कुलर्स की उगलियॉ स्पर्शपटल को छूकर जान लेती थी कि सितारे क्या-क्या कहते हैं।
कुलर्स की विचारशक्ति मात्र दिखाई दे रही वस्तुओ के दायरे मे ही बॅधकर नहीं रह गई थी। जिन तथ्यो को समझने मे अच्छे-खासे विद्वान् भी उलझन मे पड़ जाते है। उन्हे सुगमता से समझ लेने का रहस्य कुलर्स बताते थे कि ‘‘मेरे मस्तिष्क मे जो भी आंकड़े और तथ्य आदि रहते है वे मानो त्रिविमीय छवियो (Three Dimensional Pictures) मे बदल जाते है और सब कुछ स्पष्ट हो जाता है’’ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र मे अत्यधिक महत्वपूर्ण योगदान करने के कारण कुलर्स की असाधारण प्रतिभा को विश्व ने प्रतिष्ठा दी। दृढ़-आत्मविश्वास और महान् बनने की प्रक्रिया का इससे उत्तम उदाहरण और क्या हो सकता है कि बचपन मे एक दिन चर्च मे प्रार्थना के उपरान्त केट कुलर्स ने अपनी नोटबुक मे लिख लिया था -‘‘ईश्वर महान् है, लेकिन मै भी महान् हूँ।’’
आप अपने जीवन के साथ जो भी करते है या करना चाहते है यह पूर्णतः इस तथ्य पर निर्भर करता है कि आप स्वयं को किस रूप मे स्वीकार करते रहे है। आप स्वयं को जिस रूप मे अपने समक्ष प्रस्तुत करते है। आप अपने अस्तित्व को वैसा ही पाते है।
कुछ वर्ष पूर्व तक व्यक्तियो की यह धारणा थी कि कम्प्यूटर जैसा उत्तम यन्त्र बनाकर मनुष्य ने अपनी मंजिल प्राप्त कर ली है, और वह सोचने लगा कि अब इस तीव्रगामी यन्त्र की सहायता से जटिल से जटिल गणनाएं भी सुगमता से सम्पन्न की जा सकेगी। परन्तु आज व्यक्ति यह देखकर हैरान है कि दिन-प्रतिदिन एक से बढ़कर एक सुपर कम्प्यूटर बाजार मे आते जा रहे है परन्तु उसका अन्त दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा।
महान् अमरीकी व्यवसायी, मोटर-वाहन निर्माता हेनरी फोर्ड ने कहा था-‘‘प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमताओ का जितना आंकलन करता है, वह उस क्षमता से कहीं अधिक कार्य-सम्पन्नता से कर सकता है’’ लेकिन प्रत्येक व्यक्ति अपनी श्रेष्ठ रचनात्मक क्षमताओ का उचित आंकलन करने का कभी प्रयास ही नहीं करते; और आप भी तो उसी श्रेणी से बाहर निकलने मे रुचि नहीं ले रहे है, न ही प्रयत्न कर रहे है, जिस श्रेणी के व्यक्ति अपनी उत्तम क्षमताओ का समुचित उपयोग करने की कामना नहीं करते, चाहे आपकी क्षमता कुछ भी रही हो, योग्यता कुछ भी रही हो यदि आप एक बार ठान ले तो इनमे आप अविश्वसनीय विकास करने मे पूर्णतः समर्थ है। मात्र आपको अपनी क्षमताओ एवं योग्यताओ का पुर्नमूल्यांकन करने की, उनमे आवश्यक परिष्कार करने की आवश्यकता है ध्यान रखिए कि आप अपनी क्षमताओ का समुचित आंकलन ही कीजिए।
जब अनेक वैज्ञानिक आकाशीय पिण्डो पर जीवन की उपस्थिति के सम्बन्ध मे केवल विचार विमर्श कर रहे थे, तब अपनी कल्पनाशील क्षमताओ का पूर्ण उपयोग करके एक वैज्ञानिक ने दूसरे आकाशीय पिण्डो पर बुद्धिमान प्राणियो की खोज की दिशा मे अपना सार्थक कदम बढ़ाया और अन्तरिक्ष मे बुद्धिमान सभ्यताओ की खोज का उत्तम प्रयास किया। उनके इन्हीं प्रयासो ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के सान्ताक्रूज खगोल विज्ञान विभाग के उस खगोलविद् प्रोफेसर फैक डेक को महानता के सर्वोच्च शिखर पर ला खड़ा किया था।
आप भी स्वयं को सही रूप मे समझने का प्रयत्न कीजिए, स्वयं का समुचित मूल्यांकन कीजिए और उसके बाद स्वयं को उसके अनुसार बदलने का प्रयास कीजिए। इन सब के लिए अपने मस्तिष्क को निम्न 10 प्रभावशाली तथ्यो से बारम्बार स्मरण कराते रहिए-
1. अपने को स्वीकार कीजिए- आप जो भी है, जैसे भी है, जहां भी है उसी रूप मे अपने को स्वीकार कीजिए। आप अत्यन्त प्रतिभावान है, आकर्षक है, सुयोग्य है, हंसमुख है और लोकप्रिय है। इसलिए आप स्वयं को पर्याप्त मान-सम्मान प्रदान कीजिए, स्वयं को परिपूर्णता से स्वीकार कीजिए। सर्वशक्तिमान ईश्वर आपका पिता है आपको उसका पूर्ण स्नेह प्राप्त है, आपको वह अत्यन्त ही चाहता है और सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आप उसे पूर्णतः स्वीकार है। तो अब आपको ही स्वयं को स्वीकार करने मे क्या आपत्ति है, जबकि अनेक व्यक्तियो ने तो आपको बहुत पहले से ही स्वीकार किया हुआ है
2. अपने मे विश्वास रखिए- स्वयं मे आप सुदृढ़ विश्वास रखिए। इस श्रेष्ठ विश्वास को किसी भी परिस्थिति मे डगमगाने न दीजिए। महान् ईश्वर ने अपने समान ही महानता प्रदायक अनगिनत श्रेष्ठ उपहारो से आपको सुसज्जित करके भेजा है इन सर्वोत्तम उपहारो को, क्षमताओ को अपने भीतर सुन्दरता से सँजोए रखिए एवं अक्षुण्ण बनाये रखने का प्रयत्न कीजिए। इन समस्त उत्तम अलौकिक उपहारो का प्रभावशाली प्रदर्शन कर, अपने विशिष्ठ अस्तित्व को संसार मे आलोकित करिए।
3. अपने से श्रेष्ठ व्यवहार कीजिए- जिस प्रकार आप अन्य लोगो से उत्तम व्यवहार करने और उनसे उत्तम व्यवहार प्राप्त करने के लिए इच्छुक रहते है, उसी प्रकार का श्रेष्ठ व्यवहार अपने आप से भी कीजिए। अपने मस्तिष्क को उसी प्रकार विश्राम प्रदान करने की व्यवस्था कीजिए, जिस प्रकार आप अपने शरीर को विश्राम देते है। मस्तिष्क को प्रदान किया गया तनिक-सा यह विश्राम या कोई मनोरंजन आपके मस्तिष्क को नवीन उर्जा, नवीन उत्साह-उल्लास के साथ ही अतिरिक्त उर्जा उपलब्ध कराएगा और अपनी अतुलनीय निरन्तर सेवाएं प्रदानकर आपको अभिभूत कर देगा।
4. अपने को सदैव व्यस्त रखिए- आप अपने मस्तिष्क को हमेशा व्यस्त रखिए। शारीरिक रूप से और मानसिक रूप से कुछ-न-कुछ अवश्य करते रहिए। यदि आप शारीरिक रूप से थक जाएं तो मानसिक कार्य करके शरीर को विश्राम दीजिए और यदि मानसिक कार्य करते-करते थक जाएं तो कुछ हल्का-फुल्का शारीरिक कार्य करके मस्तिष्क को विश्राम प्रदान कीजिए। इस उक्ति का सदैव ध्यान रखिए-‘‘खाली दिमाग शैतान का घर।’’ शैतान को अपने मस्तिष्क मे घर बनाने का प्रयास न करने दीजिए अन्यथा यह शैतान आपके मस्तिष्क मे सदैव उपद्रव ही करता रहेगा; और आपकी नींद हराम कर देगा। अतः आप सदैव कुछ-न-कुछ करते ही रहिए और अपने को व्यस्त रखिए।

5. अपने को सदैव प्रसन्न रखिए- अपने मस्तिष्क को सदैव आनन्द उत्सव मनाने का अवसर प्रदान करते रहिए, तभी तो वह भी आपके जीवन मे प्रसन्नता के मोती बिखेरेगा और आप अपने कार्यों को सुचारू रूप से सम्पन्न करने मे सफल होगे मन के अप्रसन्न होने पर किसी भी कार्य मे अपना मन लगाना व्यक्ति के लिए दुष्कर होता है और अप्रसन्न मन की स्थिति मे किसी भी कार्य मे हाथ डालने का प्रयास करने पर उसमे त्रुटियां होने की पूर्ण सम्भावना बनी रहती है जबकि इसके विपरीत प्रसन्न और प्रफुल्ल मन समस्त कार्यों को सम्पन्न करने हेतु आपके उत्साह मे वृद्धि करके आपकी सफलता की कहानी का एक नवीन पृष्ठ रच देता है
                           इसलिए यह आवश्यक है कि आप सदैव स्वयं को प्रफुल्लित रखिए। जहां तक सम्भव हो अपनी प्रसन्नताओ को अन्य लोगो के बीच बांटने का प्रयत्न भी करते रहिए और दूसरो के दुख-दर्द मे भागीदार बनने का भी प्रयत्न कीजिए। इस प्रकार आप अपनी प्रसन्नता मे भी कई गुणा वृद्धि करने मे भी सफल रहते है
6. अपने मे अनुराग रखिए- स्वयं से अनुराग रखना भी आपके लिए अति आवश्यक है जब आप ही स्वयं से प्रेम नहीं करेगे तो अन्य लोग आपको प्रेम करने के लिए कैसे उद्यत होगे अपने से अनुराग रखने का तात्पर्य है अपनी स्थिति के प्रति पूर्णतः आश्वस्त होना। यह विश्वास रखना कि अपनी इस स्थिति मे ही रहते हुए मुझे अपना लक्ष्य प्राप्त करना है इसलिए पूरी शक्ति से स्वयं के प्रति अपनी चाहत का विकास-वृद्धि कीजिए। अपने विलक्षण अस्तित्व के प्रति अनुराग रखिए, उससे पर्याप्त प्रेम कीजिए तभी अन्य लोग आपकी ओर आकर्षित होगे और आपके सफलता अभियान मे अपना समुचित योगदान देने के लिए आगे आएंगे
7. अपने को चिन्ता-मुक्त बनाइए- चिन्ताओ को स्वयं से दूर रखने का आप तुरन्त कारगर उपाय कीजिए। ये दुश्चिन्ताएं आपके अस्तित्व को कोई हानि पहुंचाएं, आपकी कल्पना शक्ति को नष्ट करने का कोई प्रयास करे; उससे पूर्व ही आप इन चिन्ताओ की चिता सजाने का प्रयत्न कीजिए। ‘न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी’-जब दुश्चिन्ता ही नहीं रहेगी तो फिर कौन हानि पहुंचा सकता है आपको इससे मुक्ति पाने मे विलम्ब करना ‘स्वयं अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारना है’ इसलिए मस्तिष्क मे उपजी किसी भी दुश्चिन्ता का उपचार करने मे अति शीघ्र जुट जाइए।
8. अपनी भूलो को भूलिए- भूतकाल मे हुई स्वयं की गलतियो को, चूको को भूलने का यथासम्भव प्रयत्न कीजिए; जो हो गया सो हो गया, उसकी क्यो व्यर्थ चिन्ता करना, भूत का क्या पश्चाताप करते रहना, उसके लिये हर समय क्या रोना ? बीते हुए समय के दुःखद क्षणो को, अप्रिय प्रसंगो को, विगत दुःस्वप्नो को भूलने का सार्थक प्रयास कीजिए और केवल भविष्य की सुनहरी किरणो मे सराबोर होने का प्रयत्न कीजिए। भूतकाल की इन भूल-चूको को स्मरणकर अपनी शारीरिक एवं कल्पनाशील क्षमताओ को कुंठित करने का प्रयास न कीजिए। विगत की गलतियो को बार-बार याद करने की अपेक्षा उन गलतियो से सबक सीखने का यत्न कीजिए और भविष्य मे वैसी ही गलतियां दोहराने की भूल मत कीजिए। वर्तमान को सुन्दरतम बनाइए और उसी मे पूर्णता से जीने का प्रयत्न कीजिए। खुशियो की तूलिका उठाइए और अपने जीवन को सफलता-उल्लास के इन्द्रधनुषी रंग प्रदान करने मे जुट जाइए।
9. अपने सौभाग्य को आमन्त्रित कीजिए- अपने मस्तिष्क मे सौभाग्यशाली विचारधारा की बारात सजाइए और इस सौभाग्यशाली विचारधारा की बारात मे दूल्हा बना मस्तिष्क को हर प्रकार से रिझाइए ताकि यह दूल्हा सुगमता से अत्यन्त सुन्दर आपकी सफलता रूपी दुल्हन को रिझा सके ध्यान रखिए, सौभाग्यशाली विचारधारा ही आपके सौभाग्य को बलपूर्वक आकर्षित करती है
10. अपने ईश्वर के प्रति श्रद्धा रखिए- ईश्वर मे अपका दृढ़ विश्वास आपकी समस्त बाधाओ को नष्ट करने मे अविश्वसनीय रूप से समर्थ है इसलिए ईश्वर के प्रति अपने दृढ़ विश्वास को किसी भी स्थिति मे कमजोर न होने दीजिए। यह अखण्ड, दृढ़ विश्वास ही आपकी मंजिल को आपको निकट खींच लायेगा और अवश्य ही खींच लायेगा जब आप महान् साहित्यकार एच. डब्ल्यू. लोगफैलो के इन शब्दो पर भी मनन करने का सार्थक प्रयत्न करेगे-‘‘महान् व्यक्तियो को जो श्रेष्ठ प्रतिष्ठा प्राप्त हुई, वह इन महापुरुषो को अनायास एक ही प्रयास मे प्रयास मे प्राप्त नहीं हुई। जब उनके अन्य साथी सोए पडे थे, तब वे एकाग्रचित्त, शान्ति से आत्मोत्थान की दिशा मे प्रयत्नशील थे इस प्रकार वे सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचकर महान् बने’’
                              महानता-अर्जन के सिद्धान्तो का वर्णन करते हुए बैजामिन डिजरायली ने उद्घाटित किया था कि-‘‘अपने मस्तिष्क को महान् विचारो से पोषित करो नायकत्व मे विश्वास दृढ़ करने वाला ही स्वयं को नायक बनाता है’’ आप महान् है, अपने इस विश्वास को दृढ़ता प्रदान कीजिए और स्वयं से कहिए -
मै भी महान् हूँ, महान् हूँ, महान् हूँ।