रविवार, 14 अगस्त 2016

10 मोटिवेशनल किताबें जो आपको ज़रूर पढ़नी चाहिए

10 मोटिवेशनल किताबें जो आपको ज़रूर पढ़नी चाहिए
अकसर लोग मुझसे अच्छी मोटिवेशनल सेल्फ-हेल्प बुक्स के बारे में पूछते रहते हैं।  इसी बात को ध्यान में रख कर मैं आज आपके साथ ऐसी ही किताबों की एक छोटी सी list share कर रहा हूँ।  Future में मैं इसमें और भी additions करता जाऊँगा।

मैंने यहाँ listed लगभग सारी बुक्स पढ़ी हुई हैं और बिना किसी doubt के मैं  इन्हे आपको पढ़ने के लिए recommend करता हूँ।
हालांकि ये books आप कहीं से भी खरीद सकते हैं पर मेरा personal experience है कि इन्हे online Flipkart से खरीदना आसान है और सस्ता भी पड़ता है।और यदि आप ये किताबें गिफ्ट करना चाहते हैं तो भी फ्लिपकार्ट में कोई भी शिपमेंट एड्रेस दे कर के मनचाही जगह पर किताबें भेज सकते हैं।
आप इन किताबों को अपने छोटे भाई-बहनो को ज़रूर gift करें। साथ ही आप इन्हे अपने Parents , Teachers , Office colleagues या मित्रों को भी गिफ्ट कर सकते हैं।
Flipkart से खरीदने के लिए आप बुक के सामने दिए गए “Buy Now ” लिंक पर क्लिक कर के प्रोसीड कर सकते हैं.

Sno.

Book Name Hindi Version

Book Name English Version

Author

 Buying   Link

1

Rahasya / रहस्य

The Secret


Rhonda Byrne

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2

Jeet Aapki / जीत आपकी

You Can Win

Shiv Khera

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3

Sanyasi Jisne Apni Sampati Bech Di / सन्यासी जिसने अपनी संपत्ति बेच दी

The Monk Who Sold His Ferrari

Robin Sharma

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4

Ati Prabhavkari Logon Ki 7 Adatein / अति प्रभावकारी लोगों की सात आदतें

The 7 Habits of Highly Effective People

Stepehen Covey

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5

Lok Vyvhaar / लोक व्यवहार

How to Win Friends and Influence People

Dale Carnegie

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6

Badi Shoch ka Bada Jadu / बड़ी सोच का बड़ा जादू

The Magic of Thinking Big

 David J. Schwartz

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7

Shaktiman Vartaman / शक्तिमान वर्तमान

The Power of Now

Eckhart Tolle

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8

Sochiye Aur Ameer Baniye / सोचिये और अमीर बनिए

Think and Grow Rich

Napoleon Hill

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9

Alchemist / अलकेमिस्ट

The Alchemist

Paulo Coelho

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10

 Rich Dad, Poor Dad / रिच डैड, पुअर डैड

 Rich Dad, Poor Dad

Robert Kiyosaki

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क्या था डॉ. ऐ पी जे अब्दुल कलाम के जीवन का सबसे बड़ा अफ़सोस?

क्या था डॉ. ऐ पी जे अब्दुल कलाम के जीवन का सबसे बड़ा अफ़सोस?

अगर आपको अंदाजा लगाने को कहा जाए कि बताइए डॉ. ऐ पी जे अब्दुल कलाम की ज़िन्दगी का सबसे बड़ा अफ़सोस क्या रहा होगा तो आप क्या बोलेंगे?

जब मेरे मन में ये सवाल आया तो मुझे लगा कि उनका सबसे बड़ा अफ़सोस शायद किसी innovation को लेकर रहा होगा, वो कोई बड़ा आविष्कार करना चाहते होंगे, may be कोई missile या कोई ख़ास तरह का राकेट… पर कर नहीं पाए होंगे और यही उनका सबसे बड़ा regret होगा!
And I think और भी बहुत से लोग इस सवाल के जवाब में ऐसा ही कुछ सोचेंगे । लेकिन जब आप इस प्रश्न पर डॉ कलाम का उत्तर सुनेंगे तो मेरी तरह आप भी थोड़ा surprise होंगे और साथ ही महसूस कर पायेंगे कि सचमुच डॉ कलाम कितनी बड़ी और कितनी महान सख्शियत थे। तो आइये जानते हैं:

क्या था डॉ कलाम के जीवन का सबसे बड़ा अफ़सोस ? / Dr. A P J Abdul Kalam Anecdote in Hindi

एक बार डॉ. ऐ पी जे अब्दुल कलाम मुंबई के किसी कॉलेज की एनुअल सेरेमनी में गए हुए थे। वहां एक 20 साल के युवक ने डॉ. कलाम से पूछा, “ सर, आपको इतनी सफलताएं मिली हैं। निश्चित रूप से आप कभी-कभार असफल भी हुए होंगे। आप हमेशा कहते हैं कि आपने असफलताओं से सीखकर सफलता प्राप्त की है। मैं कुछ जानना चाहता हूँ: क्या कुछ ऐसा है जो आप नहीं कर पाए, और अभी भी आपको अफ़सोस होता है कि आप वो चीज नहीं कर पाए?”
डॉ. कलाम कुछ देर सोचने के बाद बोले, “ आप जानते हैं, घर पे मेरे एक बड़े भाई है जो अब 98 साल के हैं। वे धीमे-धीमे चल पाते है, बिना किसी का सहारा लिए। उनके विज़न में कुछ प्रॉब्लम है और इस वजह से हमे घर में हेमशा पर्याप्त रौशनी रखनी पड़ती है, खासतौर पे रात में।
अब देखिये, रामेश्वरम में कभी-कभी बिजली चली जाती है, इसलिए  उनका इधर-उधर जाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए पिछले साल मैंने घर पे अच्छी बैटरी वाला एक रूफ टॉप सोलर पैनल लगवा दिया। जब सूरज निकलता है तब पैनल पॉवर देता है, और रात में बैटरी पॉवर सप्लाई करने का काम करती है। अब हर समय पर्याप्त पॉवर रहती है। मेरा भाई खुश है।
जब मैं अपने भाई को खुश देखता हूँ तो मैं भी अच्छा महसूस करता हूँ। लेकिन साथ ही मुझे अपने पेरेंट्स की भी याद आ जाती है। दोनों लगभग सौ साल तक जिए , और अपने आखिरी सालों में उन्हें भी देखने में कठिनाई होती थी। तीन दशक पहले बिजली ज्यादा कटती थी। तब मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पाया। तब कोई सोलर पॉवर नहीं था। ये बात कि मैं उनकी तकलीफ दूर करने के लिए कुछ नहीं कर पाया मेरा सबसे बड़ा अफ़सोस है, कुछ ऐसा जो हमेशा मेरे साथ रहेगा।”
दोस्तों, डॉ कलाम की ये बात कितनी सरल और दिल छू लेने वाली है। इतना बड़ा वैज्ञानिक, भारत रत्न, देश का राष्ट्रपति… पर कितना सीधा, सरल और down to Earth…सचमुच उनका जीवन प्रेरणा का आपार स्रोत है।
एक तरफ जहाँ अपने माता-पिता की आँखों की समस्या के लिए कुछ ख़ास न कर पाना डॉ कलाम के जीवन का सबसे बड़ा अफ़सोस था वहीँ दूसरी तरफ आज करोड़ों युवा अपनी life में इतने busy हो गए हैं कि माता-पिता का ध्यान रखना तो दूर उनके पास उनसे बात तक करने का समय नहीं है!
हमें सोचना चाहिए कि कहीं हम ऐसे लोगों में से तो नहीं हैं जो रोजी रोटी और अपनी nuclear family की needs पूरा करने में इतना खो गए हैं कि महीनो-महीनो अपने पेरेंट्स से बात ही नहीं करते?
हमें सोचना चाहिए कि कहीं हम ऐसे लोगों में तो नहीं हैं जो ये जानते हुए भी कि माता-पिता तकलीफ में हैं पर फिर भी उनके लिए कुछ नहीं करते?
यदि हाँ, तो हमें डॉ कलाम से सीख लेनी चाहिए और हमे जन्म देने वाले, हज़ारों तकलीफें उठा कर हमें पाल-पोश कर बड़ा करने वाले अपने माता-पिता के लिए ज़रूर समय निकालना चाहिए और उनका ध्यान रखना चाहिए!
नहीं तो जीवन के अंत में हमें अपने पेरेंट्स का केयर न कर पाने का अफ़सोस हो न हो पर शायद हम सबको बनाने वाले ईश्वर को ज़रूर अफ़सोस होगा कि मैंने ये इंसान भी क्या चीज बना दी!